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शिव को जिन अनेक अलग-अलग नामों से बुलाया जाता है, उनमें से सोम एक प्रमुख और अत्यन्त महत्वपूर्ण नाम है। सोम शब्द का अर्थ होता है मदहोशी। अगर मदहोशी नहीं होगी, तो आप कभी भी परम शून्य में कूदने के लिए दीवाने नहीं होंगे, जो कि मुक्ति का एकमात्र रास्ता है। इसलिए सोम या सोम सुन्दर शिव के सभी प्रमुख नामों में से एक हैं। भगवान सोम हमेशा मदहोश रहते हैं, लेकिन पूरी तरह से सजग। वास्तव में मदहोशी ध्यान मग्न होनें का एक महत्वपूर्ण गुण है। अगर ये नहीं होगा या यूँ कहें कि अलग मदहोशी नहीं होगी, तो आप भयंकर होश में रहकर कैसे बैठेंगे। यह तो बहुत बड़ी परेशानी होगी।
ध्यान रहे कि सिर्फ़ इस तरह से यानी मदहोशी में बैठे हुए किसी चीज़ पर ध्यान केन्द्रित करने की कोशिश शिव का मूल गुण है। शिव के मस्तक पर चन्द्रमा इस बात का द्योतक है कि वह स्वयं मदहोश होते हैं, किसी पदार्थ के कारण नहीं। शिव के लगातार सोमरस पीने का मतलब है कि वह शराबी नहीं थे, बल्कि वह तो उस चाँदनी को पीते रहते थे, जिसे वह अपने बालों पर रखा करते थे और लगातार मदहोश रहते थे। ये आनन्दित स्थित अपने आप में एक लक्ष्य नहीं है, बल्कि ये आनन्दित स्थितियाँ कष्ट का डर मिटा देती हैं।
आपको बता दें कि जब कष्ट का डर नहीं होता, जब मेरा क्या होगा, ये विचार आपके अन्दर से पूरी तरह से ख़त्म होता है सिर्फ़ तभी आप जीवन को खोजने का साहस करेंगे, वरना आप उसे सिर्फ़ बचाने की जुगत में लगे रहेंगे। चाहे करिअर हो या कारोबार सब सुरक्षा के लिए है, शादी सुरक्षा के लिए है। वास्तव में सब कुछ सुरक्षा के लिए ही है और सुरक्षा से ही जुड़ा हुआ है।
जब तक कष्ट का डर लगातार अपनी भूमिका निभा रहा है आप जीवन के गहरे आयामों में जाने का साहस नहीं करेंगे। सत्य यह है कि जब इस तरह से आप मदहोश लेकिन पूरी तरह से सजग होते हैं, तभी कष्ट का डर नहीं होता है और आप कहीं भी जाने के लिए तैयार होते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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