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असित खन्ना ग़ाज़ियाबाद के कौशाम्बी में यशोदा अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। इनका ननिहाल नैतीताल में है, जहाँ से बचपन से ही जुड़े हैं, क्योंकि ये अपनी बचपन की छुट्टियाँ अपने ननिहाल में ही बिताते थे। लिहाजा नैनीताल की हर छोटी-बड़ी समस्या के बारे में असित खन्ना को बख़ूबी पता है। आपको बता दें कि चूँकि असित खन्ना पेशे से एक डॉक्टर हैं। इसलिए नका सबसे पहले ध्यान पहाड़ के लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर ही इनकी नज़र पड़ी। यह पहले से विदित है कि पहाड़ के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएँ बामुश्किल मुहैया होती हैं।
इसीलिए असित खन्ना ने साल 2014 में अपने चार डॉक्टर साथियों के साथ भीमताल के पास स्थित नौकुचियाताल में पहला मेडिकल कैंप लगाया, जहाँ इनके पहले ही कैंप में लगभग एक हज़ार लोग आए। तीन दिन तक चले इस कैंप की सफलता से असित खन्ना को उत्साह मिला और मन को सुकून भी। दिलचस्प है कि अपने इस विचार से ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को और स्वयंसेवकों को जोड़ने के लिए असित खन्ना ने वर्क कम प्लेज़र के कॉन्सेप्ट को अपनाया। यह वाकई बहुत ही अच्छा और यूनिक प्रयास है।
इसमें असित खन्ना और उनकी टीम दिन में लोगों का इलाज करते हैं, स्कूलों में जाकर ज़रूरतमंदों को क़िताब, कॉपी, बैग और जूते-चप्पल आदि बाँटते हैं। इसके बाद रात में सभी लोगों के साथ टेंट लगाकर बोनफ़ायर और गाने-बजाने का कार्यक्रम होता है। वास्तव में असित खन्ना के इस ट्रीटमेंट से लोग मन से उनके साथ जुड़ते हैं।
दिन-ब-दिन पहाड़ों पर बढ़ते जा रहे पर्यटकों के बोझ से इकी प्राकृतिक सुन्दरता कम होती जा रही है, इसलिए असित खन्ना और उनकी टीम यहाँ पर्यावरण के लिए भी काम कर रही है। इसके साथ-साथ स्कूली बच्चों को ये अपने साथ जोड़कर उनमें नशा के ख़िलाफ़ लड़ाई की ताक़त भी फूँकते हैं। वाकई आसित के इन प्रयासों से लोगों को प्रेरणा लेने की ज़रूरत है।
Author: Amit Rajpoot
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